चित्रा नक्षत्र :- चित्रा नक्षत्र कन्या राशि के अन्त दिखाई पड़ता है और तुला राशि मे उत्तरार्ध में पड़ता हैं इन जातकों में अपनी प्रशंसा सुनना,सुन्दर दिखाई देना बहुत अच्छा लगता हैं।तुला राशि सूर्य नीच का हो जाता है। जातक में आत्मविश्वास कम पाया जाता है। आत्म बल भी कम हो जाता हैं।फिर वो दूसरों का सहारा लेते हैं। कार्य प्रारम्भ करता हैं बड़ी लग्न कार्यरत रहता है फिर भी कभीकभी सफल नही हो पाता हैं। चित्रा नक्षत्र को स्त्री परिभाषाऔर वैश्य जाति से सम्बोधित करते है। जिस तरह वैश्य में वस्तुओं को एकत्रित करके बेचने में सक्षम होते हैं।व्यवसाय करने में दक्ष होते हैं। दक्षिण दिशा और दक्षिण पश्चिम दिशा को चित्रा नक्षत्र प्रभावित दिशा मानते है।
चित्रा नक्षत्र का प्रथम चरण:-यह चरण कन्या राशि के 23°29' से 26°40' तक सूर्य के सिंह के नवांश में पड़ता हैं।ऐसा जातक देह सौष्ठव और रूप सौन्दर्य को सजाने लगा रहता हैं। जातक संयमी, सदाचारी,धर्म और आध्यात्मिक गुणों से भरपूर होता हैं। दूसरे के और स्वयं के भेद छुपाने में दक्ष होता हैं। ये जातक छुपा कर कार्य करने सक्षम होते हैं। सूर्य,मंगल,बुध और राहु को चित्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में बली होते हैं।
चित्रा नक्षत्र द्वितीय चरण :- कन्या राशि के 26°40' से 30° तक बुध के नवांश में पड़ता है।बुध हमारी बुद्धि का संचालन करने में साक्ष्य हैं।सभी कार्यो को नियमानुसार व्यवस्थित ढंग से कार्य करने वाला होता हैं।अनुशासन, वाणी को भी निर्धारित करते है।द्विस्वभाव राशियों में कभी मनोस्थिति अवश्य दुविधापूर्ण हो जाती हैं।शनि,राहु और बुध चित्रानक्षत्र के द्वितीय चरण में बली होते है। आध्यात्मिक रूप से अविकसित जातक का शनि चित्रा के दूसरे पद में होने अतिवादी और धर्म के आस्था में कट्टरपंथी होता हैं और उसको पापी भी बना सकता हैं।
चित्रा नक्षत्र का तीसरा चरण :- यह चरण तुला राशि के शुक्र के नवांश में आता हैं। जिन बच्चों का जन्म इस पद में होता हैं वो आपसी तालमेल बनाकर संयम पूर्वक चलते हैं। ये जातक मिलनसार, हँसमुख होते है कभी कभी अपनी प्रतिष्ठा के लिए के लिए लोगों का दुरुपयोग भी किया करते है। बुध,शुक्र एवं शनि चित्रा नक्षत्र के इस चरण में बली होते है।
चित्रा नक्षत्र चतुर्थ चरण :- तुला राशि के 3°20' से 6°40' तक मंगल के वृश्चिक नवांश में पड़ता है।शुक्र ग्रह का मंगल की राशि मे होने से जातक कामुक, रति सुख लोलुप होता हैं। अपने मनोभावों को छिपाने में सक्षम होता हैं। ये जातक बहुत ज्यादा धन खर्च करते है।शुक्र,राहु और केतु तथा शनि अच्छे परिणाम देते है।
आजीविका :- चित्रकला, फैशन,सौन्दर्य प्रसाधनों, अच्छे व्यक्ता,सभी संगीत रचनाओं, वास्तु विशेषज्ञ, आभूषण निर्माता, चित्रकार,कला निर्देश, उपन्यासकार, नाटक मंचन, जड़ी बूटियों के खोजी, प्लास्टिक सर्जरी ,व्यवसायी, शल्यचिकित्सक हो सकते है।
चित्रा नक्षत्र के नक्षत्रपति मंगल ग्रह हैं जोकि जातक को तामसिक वृति का बनता हैं। यह नक्षत्र माया से सम्बंधित हैं यह गुण भी दिखाई देंगे। मंगल ग्रह अग्नि तत्व का समावेश भी हैं। ऊर्जा शक्ति का समावेश भी है। राक्षस गण का नक्षत्र हैं। इन जातकों में शुक्र की सुंदरता ,कोमलता,सौंदर्य, मंगल की तरह वैर विरोध, सौम्य,कटूनीति वाली सभी गुणों का समावेश होगा।
शक्ति उपासना करनी चाहिए। वैश्य जाति का नक्षत्र हैं। माथा,और मस्तिष्क तथा गर्दन को चित्रा नक्षत्र का स्थान माना जाता है।


