मूल नक्षत्र भचक्र के तीसरे भाग का प्रथम नक्षत्र हैं।यह मूल संज्ञक नक्षत्र हैं।आकाश गंगा के मध्य में स्थित हैं।मूल का मुख्य तारा शोला बिच्छू का डंक हैं।मूल नक्षत्र सबसे दक्षिणी नक्षत्र हैं।नक्षत्रपति केतु हैं।दूसरे शब्दों में किसी वृक्ष की जड़ भी कहते हैं।मूल नक्षत्र जन्म लेने वाले जातक सीधा,सरल एवं स्पष्टवादी होता हैं।ये जातक किसी आडम्बर का दिखावा नही करते है। पौधे लगाने के बाद मुख्यतः सारा कार्य जड़ ही करती हैं,उसी प्रकार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले कठिन परिश्रम करना पड़ता है।जिसप्रकार जड़ पृथ्वी के भीतर छिपी रहती हैं,उसी तरह इन लोगों के मनोंभाव को पढ़ना सरल नही होता हैं। ये जातक अपनी वंशानुगत परम्परा को निभाने के विशेष गुण होते है।केतु संचित कर्मो का फल देने में सक्षम होते है। वही प्रारब्ध बनकर इस जन्म में जातक के सन्मुख प्रगट होता हैं।ये जातक को विगत जन्मो से प्राप्त ज्ञान,अनुभव व दक्षता की सहायता से सुख और समृद्धि प्राप्त करता हैं।
मूल नक्षत्र भचक्र के तीसरे भाग का प्रथम नक्षत्र हैं।यह मूल संज्ञक नक्षत्र हैं।आकाश गंगा के मध्य में स्थित हैं।मूल का मुख्य तारा शोला बिच्छू का डंक हैं।मूल नक्षत्र सबसे दक्षिणी नक्षत्र हैं।नक्षत्रपति केतु हैं।दूसरे शब्दों में किसी वृक्ष की जड़ भी कहते हैं।मूल नक्षत्र जन्म लेने वाले जातक सीधा,सरल एवं स्पष्टवादी होता हैं।ये जातक किसी आडम्बर का दिखावा नही करते है। पौधे लगाने के बाद मुख्यतः सारा कार्य जड़ ही करती हैं,उसी प्रकार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले कठिन परिश्रम करना पड़ता है।जिसप्रकार जड़ पृथ्वी के भीतर छिपी रहती हैं,उसी तरह इन लोगों के मनोंभाव को पढ़ना सरल नही होता हैं। ये जातक अपनी वंशानुगत परम्परा को निभाने के विशेष गुण होते है।केतु संचित कर्मो का फल देने में सक्षम होते है। वही प्रारब्ध बनकर इस जन्म में जातक के सन्मुख प्रगट होता हैं।ये जातक को विगत जन्मो से प्राप्त ज्ञान,अनुभव व दक्षता की सहायता से सुख और समृद्धि प्राप्त करता हैं।
आज दिनॉक 20-04 -2014 3 बजकर 06 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र के मूल दूसरे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी शुक्र ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी केतु है
। चन्द्र और केतु व शुक्र ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक त्यागी होता औरशुक्र और केतु व चन्द्र । क्योकि नक्षत्र पद 3 डिग्री से 20 मिनट से 6 डीग्री 40 मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक ज्योतिषी,सलाहकार व मन्त्री होता
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 20-04 -2014 8 बजकर 12 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र तीसरे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी बुध ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी केतु है
। चन्द्र और केतु व बुध ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक हिंसक,बलवान होता औरशुक्र और केतु व चन्द्र । क्योकि नक्षत्र पद 6 डिग्री से 40 मिनट से 10 डीग्री 00 मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक ज्योतिषी,सलाहकार व मन्त्री,वकालत होता है
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 20-04 -2014 13 बजकर 53 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र चौथे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी चन्द्र ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी केतु है
। चन्द्र और केतु व चन्द्र ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक हिंसक,बलवान व स्थिर कर्मों वाला होता औरचन्द्र और केतु व चन्द्र । क्योकि नक्षत्र पद 10 डिग्री से 00 मिनट से 13 डीग्री 20
मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक
ज्योतिषी,सलाहकार व मन्त्री,वकालतऔर दवा क्षेत्र में कार्य करने वाला होता है
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 20-04 -2014 19 बजकर 34 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 20-04 -2014 19 बजकर 34 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी मंगल ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है
। चन्द्र और शुक्र व मंगल
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 20-04 -2014 19 बजकर 34 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी sun ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है
। चन्द्र और शुक्र व sun ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक दिखाने मात्र से उपकार करने व माता का प्रिय होता औरचन्द्र और शुक्र व sun
। क्योकि नक्षत्र पद 13 डिग्री से 20 मिनट से 16 डीग्री 40
मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक समुद्र से
जुड़ा व्यापर कार्य करने वाला होता है
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक दिखाने मात्र से उपकार करने व माता का प्रिय होता औरचन्द्र और शुक्र व मंगल । क्योकि नक्षत्र पद 13 डिग्री से 20 मिनट से 16 डीग्री 40 मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक समुद्र से जुड़ा व्यापर कार्य करने वाला होता है
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है । चन्द्र और शुक्र व मंगल ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक दिखाने मात्र से उपकार करने व माता का प्रिय होता औरचन्द्र और शुक्र व मंगल । क्योकि नक्षत्र पद 13 डिग्री से 20 मिनट से 16 डीग्री 40 मिनट तक रहेगा । इस समय धनु राशि में प्रवेश करेगा है जातक समुद्र से जुड़ा व्यापर कार्य करने वाला होता है
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
कभी कभी मूल नक्षत्र का जातक संकुचित विचार वाला, देश एवं समाज की प्रति लापरवाह सुख केलिए लोभी हो जाए तो आश्चर्य नही करना चाहिए।जो बच्चे मूल नक्षत्र में पैदा होते हैं गण्डमूल दोष की पूजा अवश्य करवानी चाहिए। मूल नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी नृति को माना जाता हैं।जोकि प्रलयंकाल शिव की संहार शक्ति मानते हैं।जिस देवी अधर्म और हिंसा की पुत्री ,तथा भय व मृत्यु की माता की उपाधि दी जाती है।मूल नक्षत्र को भगवान विष्णु के दोनों पैर स्वीकारा हैं ।किसी लग्न यदि मूल नक्षत्र में हो तो जातक के नाक,कान बड़े, अध्रोष्ठ मोटा होता हैं।मूल नक्षत्र का जातक घमंडी, स्वयं को श्रेष्ठ मानने वाला होता हैं।हठी,साहसी, छल,प्रपंच से भरपूर होता है।विद्वानों ने मूल नक्षत्र को कसाई जाति का नक्षत्र मानते हैं।मूल नक्षत्र को नपुंसक मानाजाता हैं
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