वही जन्म नक्षत्र कहलाता हैं । जीवन की दशा और अच्छे व बुरे परिणाम इसी पर निर्भर करता है ।
सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक की लग्न या चन्द्र लग्न में से कौन बलवान है । जो भी अधिक बलवान होगा वही जन्म नक्षत्र,नक्षत्र में से अधिक बलवान होगा ।
गण्डमूल नक्षत्र :- आश्लेषा,मघा,ज्येष्ठा,मूला,रेवती और अश्विनी ये गण्ड मूल नक्षत्र कहते है । गण्ड का अर्थ गाँठ अथवा सन्धि यदि नक्षत्र की सन्धि नही तो राशि सन्धि होती है । वह सन्धि अशुभ होती है ।
पंचक नक्षत्र :- जब चन्द्रमा कुम्भ और मीन राशि में होता है ।
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