Sunday, 13 March 2016

Rohini nakshatra

        रोहिणी नक्षत्र :( 10 से -13-20 अंश तक चार चरण) - इस नक्षत्र के चार चरणो के समावेश वृष राशि का निर्माण होता है।  इस प्रथम चरण के स्वामी  मंगल है चन्द्र और मंगल मित्र है ।  इस पाद जन्म लेने वाला जातक सौभागयशाली होता   है   । । ऎसे जातक सुन्दर, स्त्री संज्ञक, रजत गुण वाला, क्षत्रिय वर्ण, उधर्व मुख तथा बड़ी सज्ञा वाला नक्षत्र है ।

                                    
       रोहिणी नक्षत्र नक्षत्रों में श्रेष्ठ है और चन्द्रमा की अमृत शक्ति का बीज माना जाता है। रोहिणी प्रजापति ब्रह्मा जी की पोती हैं, ब्रह्मा जी रोहिणी के अंदर रहते हैं। लाल रंग सुख-समृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है। बैल वृषभ राशि का प्रतीक है और रोहिणी नक्षत्र में दो बैलों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी को संज्ञा दी जाती है। वृष कुण्डली में दूसरा घर और दूसरा घर धन और आर्थिक व्यवस्था और उद्योग और वाणिज्य की धुरी होने के कारण, बच्चे में दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत, मेहनती स्वभाव और हर स्थिति का सामना करने वाले लोगों के सभी गुण होते हैं। रोहिणी नक्षत्र शूद्र जाति का माना गया है। शुक्र और चंद्रमा वृष राशि के हैं। यह माता की प्रसन्नता का प्रतीक है और रोहिणी नक्षत्र का संबंध पृथ्वी से है। बुद्धि, कला और विज्ञान, संगीत, मनोरंजन, महंगे कपड़े, बैंक, वित्तीय संस्थान, और खाने-पीने की चीजों को खरीदने और बेचने का व्यवसाय। नाग योनि से होता है। काम कला के 64 गुणों में से 32 गुण/अधिकार रोहिणी नक्षत्र के साथ हैं। सर्प के सभी गुण रोहिणी नक्षत्र में होते हैं। रोहिणी नक्षत्र का वास फलों के बागों, झीलों, बाजारों, मल्टीप्लेक्स, होटलों, फिल्मों, थियेटरों, हीरों, रत्नों, कीमती धातुओं और कपड़ों में होता है। रोहिणी नक्षत्र के जातक बहुत ही सुंदर नेत्र, कोमल और मनमोहक मुस्कान वाले होते हैं।


 ऐसे जातक अधिक शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने वाला होता है । ऐसे जातक दूसरे के दोषो को निकालने में `लगा रहता है । जातक कमजोर शरीर वाला तथा पराई स्त्री में रत रहता है । संगीत और सौन्दर्य प्रेमी, अच्छे कपड़े, जेवर पहनने का शौकीन होता हा । दूसरे चरण में पैदा होने वाला जातक परिवार से अधिक प्यार करने वाला और आत्मकेन्द्रित रहने वाला होता है । तीसरे और चौथे जन्म लेने जातक छोटे हाथ व पैर वाला होता है ।  व्यवहार कुशल  स्वभाव व धार्मिक भावना वाला होता है । ऐसे जातक अच्छे सलहाकार, पेय प्रदार्थो, होटल, तेल संमबन्धित, वस्त्रो का व्यापार का कार्य कर सकते है।  बुध ग्रह इस चरण  का स्वामी है । यदि जातक का जन्म रात्रि के समय हो तो कठोर ह्रदय वाले, विदेश में घूमने वाला होता है । जातिका इस चरण में पैदा हो तो वह बहुत सुन्दर होती है ।

Rohini Nakshatra: (Four steps up to 10 to -13-20 degrees) - The Taurus is comprised of the four stages of this constellation. Swami Mangal H. Chandra and Mangal Mitra are the first steps. The person who is born in this foothills is very fortunate. . This Jataka is a beautiful, feminine composer, silver-bearer, Kshatriya Varna, Udharva Mukher and a great sagya nakshatra. Such a person is more knowledgeable and knowledgeable. Such a person is kept in removing the flaws of others. Jatak stays in a weak body and is in a perfect woman. Music and beauty lover, good clothes, and fond of wearing jewelry. The person born in the second phase is more loving and self-centered than the family. The third and fourth births are small arms and legs. Behavior is of good nature and religious sentiment. Such people can work in good business, beverage products, hotels, oil related, textile business. Mercury is the owner of this phase. If a person is born at night, then a hard heart is roaming abroad. If the Jatika is born in this phase, then it is very beautiful.

 

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