आश्लेषा नक्षत्र :- इस
नक्षत्र के चारो चरणों से कर्क राशि का समापन होता है । इस नक्षत्र के
स्वामी ग्रह बुध ग्रह है , इस नक्षत्र में छह तारे है । जो चक्राकार है
,भगवान सूर्य अगस्त मास में आश्लेषा नक्षत्र में गोचर करते है तारा मण्डल
में नौवा नक्षत्र है राशि और नक्षत्र का छिद्र बिन्दु है इस अन्तिम छोर
होने के कारण इसका मूल यानि गण्ड मूल में आता है ।
प्रथम चरण :- इस चरण में जन्म लेने वाला जातक बुद्दिमान और व्यवहार कुशल तथा भविष्य वाला होता है | नक्षत्र स्वामी बुध ग्रह है । इस चरण के स्वामी गुरु ग्रह है , जातक में सन्तानहीनता का दोष हो सकता है । नक्षत्र पाप प्रभाव में तो जातक कपटी, धोखादेने वाला तथा लुकछिप कर वार करने वाला होता है, पूर्व जन्म के संचित कर्मो के आधार कार्य करने वाला होता है । कर्ण व नाख़ून संबन्धित रोग हो सकते है ।
दूसरा चरण :- इस चरण के स्वामी ग्रह शनि है, बुध और शनि के योग पर चन्द्रमा का प्रभाव पड़ने से जातक में चोरी व दूसरे अधीन कार्य रत रहता है । तीसरा चरण :- इस चरण के स्वामी शनि ग्रह है जातक रोगी का जीवन रहता है । गोपनीय और अनूठी होती है तथा माता के चरण अच्छा नहीं होता है । चौथा चरण :-
इस चरण के स्वामी गुरु ग्रह है । जातक बुद्दिमान, तर्कशील, धार्मिक, ईमानदार, लोकप्रिय तथा दयावान होता है । आर्थिक दृष्टि से सक्षम होता है । जातक स्वय अपनी सीमाओं का निर्धारण करते है । पिता के लिए यह चरण हानिप्रद होता है ।
सर्पराज वासुकि के सिर पर स्थान मिला है जोकि इसे सर्प कुण्डली से भी गणना की जाती है ।
दूसरा चरण :- इस चरण के स्वामी ग्रह शनि है, बुध और शनि के योग पर चन्द्रमा का प्रभाव पड़ने से जातक में चोरी व दूसरे अधीन कार्य रत रहता है । तीसरा चरण :- इस चरण के स्वामी शनि ग्रह है जातक रोगी का जीवन रहता है । गोपनीय और अनूठी होती है तथा माता के चरण अच्छा नहीं होता है । चौथा चरण :-
इस चरण के स्वामी गुरु ग्रह है । जातक बुद्दिमान, तर्कशील, धार्मिक, ईमानदार, लोकप्रिय तथा दयावान होता है । आर्थिक दृष्टि से सक्षम होता है । जातक स्वय अपनी सीमाओं का निर्धारण करते है । पिता के लिए यह चरण हानिप्रद होता है ।
यदि नक्षत्र व चरण स्वामी पाप प्रभाव में हो तो परिणाम विपरीत हो सकते है ।
व्यवसाय :- रसायनिक अभियन्ता , मादक पदार्थो का उत्पादन तथा क्रय-विक्रय व तस्करी, ठगी, मिथ्या आडंबर और धन समबन्धित, तत्रिंक विद्या व् घोटाले का कार्य । आध्यात्मिक शक्तियों का ज्ञाता व उनका स्वामी भी सकता है ।
यदि नक्षत्र स्वामी शुभ होतो जातक संगीत,साहित्य व पत्रकार तथा वस्त्र निर्माण क्रय-विक्रय करने सक्षम होता है ।
आकाश मंडल में आश्लेषा नक्षत्र नवम स्थान पर मिलता है।तारा मंडल में सर्प के राजा वासुकी के शीश मंडल पर स्थान मिला है और भगवान श्री विष्णु जी की शेष शैया वाले नागराज शेष से जुड़ा हुआ मानते हैं। भगवान शिव जी ने अपने आभूषण के रूप में धारण किया है। जन्म के समय नक्षत्र का शुभ प्रभाव होता है तो जातक बुद्धिमान, व्यवहार कुशल, भविष्य दृष्टा और प्रभावशाली होता है। यदि नक्षत्र पाप प्रभाव में हो तो जातक स्वार्थी, धोखे बाज, कपट कुशल और छिप कर प्रहार करता है।भगवान श्री राम जी का अनुज लक्ष्मण को शेष नाग जी अवतार माना जाता है। जातक का लग्न आश्लेषा नक्षत्र में जन्म हुआ है तो क्रोध, उत्तेजना, शीघ्र प्रहार करता है।जातक चौकोर देह, होठ, बड़े मुख वाला,छोटी आंखे, पीत वर्ण और शकी स्वभाव वाला होता है।झूठी प्रशंसा, आडम्बर, चापलूसी करने वाला होता है।भूख बर्दाश्त नहीं होती हैं बाहरी व्यंजन को महत्व देता है। मादक पदार्थों का सेवन करना और छल कपट से व्यापार करना शौक होता है।
Ashleesha Nakshatra: - The closing of the Cancer sign from the four stages of this constellation. The lord of this constellation is the planet Mercury, this constellation has six stars. The sun, which is ringed, Lord Sun transits into the Ashshaysha constellation in the month of August, the star constellation is the ninth constellation, and the point of constellation is the point of constellation and due to this ending end, it originates in the root of the root.
On the head of Sarpraj Vasukhi, which is also counted by the serpent horoscope.
The first step: - The person born in this phase is Baddiman and behaviour efficient and future. Nakshatra is the planet Mercury. The master of this phase is the master planet, the person can be the culprit of childhood. Under the constellation sin, then the person is a deceitful, deceitful and deceitful person, who is working on the basis of the accumulated deeds of previous birth. Diarrhea and nail related diseases can occur.
Second stage: - The owner of this phase is the Saturn, due to the influence of the Moon on the mercury and the yoga of Saturn, the person is stealing and under the other.
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