इस की नक्षत्र धनु राशि में 13-20 से 26-40' तक आधुनिक खगोलशासि्त्रयों ने इसे तीन तारों के रूप में मनाते है । पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का अर्थ है। जिसे कोई जीत न सके अजेय है । इसका चिन्ह पंखे के समान शीतलता प्रदान करता हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक अपने विचार व अपने भेद छिपाने में सक्षम होता हैं। विपरीत परिस्थिति मे संयम व संतुलित बनाए रखने मे दक्ष होता है। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र ग्रह होता हैं धन और वैभव का स्वामी होता हैं।ऐसा जातक उत्साह और उमंग से अपने लक्ष्य की बढ़ने में सक्षम होता हैं। इस नक्षत्र वाले जातक अपना कार्य गुप्त व रहस्य पूर्ण ढंग से करने में भी सक्षम होते हैं। ऐसे जातक जल के समीप रह कर वाले स्थानों पर रह अपने व्यवसाय की उन्नति करते हैं । ऐसा जातक कोई कार्य शुरू करने से पहले कई बार चिन्तन करता है । वह अपना सहयोगियों का भी उत्साह व मनोबल बना कर चलता है । ऐसा जातक कभी दुःखी नहीं होता है । यह जातक हमेशा पूरी निष्ठां से अपने कर्म को पूरा करता है । यह जातक हँसमुख, मिलनसार व धनी होता है |
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। इस नक्षत्र का प्रधान गुण हैं।अजेय जैसे पूर्व + आषाढ़ा = अजेय + ढाक की लकड़ी का दंड यानि तपोबल में अजेय माना जाता हैं। हमारे विद्वान इसको हाथ के पंखे की संज्ञा देते हैं। पँखा झलने से गर्मी दूर होती है मनुष्य को शीतलता मिलती हैं। कभी -कभी धुंए से बचकर अग्नि की लौ प्रगट करने के लिए पंखे से हवा देना भी आवश्यकता होती हैं।पूर्वाषाढा नक्षत्र की अप:देवी अधिष्ठात्री देवी हैं। जिस प्रकार बादल में छुपा जल दिखाई नही देता है। इस नक्षत्र में अपने कार्य गुप्त ढंग से पूर्ण करते हैं। पूर्वाषाढा नक्षत्र जलतत्व का प्रतिनिधित्व करता है भगवान विष्णु और लक्ष्मी जल में निवास करते हैं। इस अभिप्राय है माँ लक्ष्मी की अनुकम्पा इस नक्षत्र में दिखाई देगी। शुक्र इस नक्षत्र के स्वामी है। शुक्र के सभी जातक में दिखाई देंगे। बृहस्पति की राशि में शुक्र का प्रवेश होता हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। इस नक्षत्र का प्रधान गुण हैं।अजेय जैसे पूर्व + आषाढ़ा = अजेय + ढाक की लकड़ी का दंड यानि तपोबल में अजेय माना जाता हैं। हमारे विद्वान इसको हाथ के पंखे की संज्ञा देते हैं। पँखा झलने से गर्मी दूर होती है मनुष्य को शीतलता मिलती हैं। कभी -कभी धुंए से बचकर अग्नि की लौ प्रगट करने के लिए पंखे से हवा देना भी आवश्यकता होती हैं।पूर्वाषाढा नक्षत्र की अप:देवी अधिष्ठात्री देवी हैं। जिस प्रकार बादल में छुपा जल दिखाई नही देता है। इस नक्षत्र में अपने कार्य गुप्त ढंग से पूर्ण करते हैं। पूर्वाषाढा नक्षत्र जलतत्व का प्रतिनिधित्व करता है भगवान विष्णु और लक्ष्मी जल में निवास करते हैं। इस अभिप्राय है माँ लक्ष्मी की अनुकम्पा इस नक्षत्र में दिखाई देगी। शुक्र इस नक्षत्र के स्वामी है। शुक्र के सभी जातक में दिखाई देंगे। बृहस्पति की राशि में शुक्र का प्रवेश होता हैं।
From 13-20 to 26-40 'in the constellation Sagittarius zodiac, modern astronomers celebrate it as three stars. The meaning of the pravishadha constellation is. Anyone who can not win is invincible. Its symbol provides coolness similar to the fan. The person born in this constellation is able to hide his thoughts and distinctions. In the opposite situation, it is efficient to maintain restraint and balance. The master of this constellation is the planet Venus, the lord of wealth and splendor. Such a person is able to grow his goal with enthusiasm and excitement. People with this constellation are capable of doing secret and secrecy in their entirety. Living in places near such kind of water, grow their business. Such a person thinks many times before starting any work. He also makes his colleagues enthusiasm and morale. Such a person is never sad. This person always fulfills his karma with full devotion. This person is happy, friendly and rich.
The lord of Purvashada Nakshatra is Venus. The main virtues of this nakshatra are the invincible ones like the former + aashadha = invincible + the punishment of Dhaka wood i.e. invincible in Tapobal. Our scholars term it as a fan of the hand. The heat is removed by fanning, the person gets cold. Sometimes it is also necessary to vent air from the smoke to reveal the flame of fire.

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