विशाखा नक्षत्र को शादी समारोह में सुसज्जित गेट की उपमा दी गई है।तुला राशि का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह से किया जाता है।विशाखा नक्षत्र को विवाह का कारक भी मानते हैं। शादियों में प्रवेश द्वार इस लिए बनाए जाते है कि लड़की एक घर को छोड़ नए घर में प्रवेश होता हैं। सुसराल एक नव चुनौतियो और परिस्थितियों का आरम्भ होता हैं। विशाखा नक्षत्र में एक विशेष गुण लक्ष्य को प्राप्त करने की होड़ लगी रहती हैं। दूसरे शब्दों में यह कह सकते हैं चाहे बाहरी शत्रु हो या भीतरी शत्रु हो। यह उपमा काम,क्रोध,लोभ,मोह और अंहकार को जीतने का लक्ष्य है।
कुछ विद्वानों ने इंद्र और अग्नि को विशाखा नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। यदि विशाखा नक्षत्र वाले जातक सूरा -सुंदरी के फेर में पड़ जाए तो निश्चय ही संकट में पड़ जाता है। अग्नि को देवताओं का मुख माना जाता है जो यज्ञाग्नि से तृप्ति पाते है। अग्नि देह का बल बढ़ाने के लिए जठराग्नि हैं। भोजन बनाने के लिए अग्नि का प्रयोग किया जाता हैं। सूक्ष्म रूप से पराक्रम, परिश्रम,दृढ़ निश्चय, एवं साहस का सम्बंध भी अग्नि से है। विशाखा नक्षत्र वाले जातक साहसी,पराक्रमी होते हैं यदि इसका पापत्व हो तो जातक लोभ,मोह,ईर्ष्या और क्रोध की अग्नि में जलता रहता हैं। इंद्र और अग्नि का सम्बंध बदलो और वर्षा से भी होता हैं। विशाखा नक्षत्र का प्रयोग कृषि कार्य में भी उपयोग करते है। विशाखा को अर्थ है दृढ़ निश्चय । विशाखा नक्षत्र के तीसरे पद शुक्र की तुला राशि मे होने से जातक उत्सव प्रेमी व भोग विलास के प्रति आदर बुद्धि वाला होता हैं। जातक सुन्दर नैंन -नक्श एवं सुंदर आँखों होती हैं।वह विनम्र ,मिलनसार होता है। कभी ज्यादा लोभ लालच के चक्र में पड कर असफल और हताश हो जाता है।धुन और सनक ही उसे डुबो देती है जिससे वो अध्यात्म की ओर मूढ़ जाता हैं।संसार सागर से तर जाता हैं।
विशाखा नक्षत्र एक सक्रिय नक्षत्र हैं।अपनी धुन का पक्का होता हैं।उसके वो निरन्तर कार्यशील रहता हैं।तुला राशि मे शनि उच्च के होते हैं अच्छा सेवक किसी जिन्न की रहता कार्य करता है। म्लेच्छ जाति का माना जाता है।कभी -कभी ये लोग डाकू, क्रांतिकारी एवं आंतकवादी रूप होकर संसार मे त्रास कर देता है। यह स्त्री नक्षत्र हैं इच्छा,प्रेम में व्याकुलता प्राप्त करने के लिए समर्पण के गुण दिखाई देते हैं।भुजा एवं वक्षःस्थल का अंग माना जाता है।कफ प्रधान नक्षत्र है।वृश्चिक राशि मे हो तो वो एक जल राशि हैं चन्द्रमा नीच के होते है।कफ दोष प्रधान करता है।पश्चिम दिशा का स्वामी एवं वृश्चिक राशि का सम्बंध उत्तर दिशा से सम्बंध बनता परन्तु दक्षिण दिशा में प्रभावी माना जाता है।
शुक्र ,मंगल,यम,केतु एवं गुरु का सम्बन्ध विशाखा नक्षत्र से माना जाता हैं।गुरू तो विशाखा नक्षत्र के स्वामी हैं।शुक्र और मंगल इस नक्षत्र के राशीश हैं।इसी प्रकार केतु और यम का संम्बंध भी वृश्चिक राशि से है। शुक्र +गुरु , शुक्र +मंगल, शुक्र +मंगल+केतु , मंगल+गुरु तथा मंगल +शुक्र +केतु युति विशाखा नक्षत्र प्रभाव डालती हैं। भचक्र का 16 नक्षत्र विशाखा नक्षत्र हैं। 16 वां अंक विपत्ति,दुर्घटना,मानसिक संताप,संकट और बर्बादी से जोड़ा जाता है। जैसे मीरा और राधा जी ने अपने प्रियतम कृष्ण जी प्राप्त करने कठोर तपस्या के विषपान करना पड़ा था। राधा रानी जी प्रभु को पाने के लिए वन में विहार करना पड़ता है। विशाखा नक्षत्र को मुनि वशिष्ठ के वंशज माना जाता हैं।
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 17-04 -2014 5
बजकर 03 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र के विशाखा दूसरे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी शुक्र ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी गुरु है
। चन्द्र और गुरु व शुक्र ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक आयु
थोड़ी होगा । क्योकि नक्षत्र पद 23 डिग्री से 20 मिनट से26 डीग्री
40 मिनट तक रहेगा । इस समय तुला राशि में प्रवेश करेगा है । ऎसे
जातक वाक्पुट व वायुयात्रा करता है ।
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
जय माँ अम्बे तेरी जय हैं
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 17-04 -2014 10 बजकर 57 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र के विशाखा तीसरे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी बुध ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी गुरु है
। चन्द्र और गुरु व बुध ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक वाक्पुष्ट होगा । क्योकि नक्षत्र पद 26 डिग्री से 40 मिनट से30 डीग्री 00 मिनट तक रहेगा । इस समय तुला राशि में प्रवेश करेगा है । ऎसे
जातक वाक्पुट व वायुयात्रा करता है ।
आज तिथि द्वितीय दिन वीरवार
जय माँ अम्बे तेरी जय हैं
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 17-04 -2014 16 बजकर 50 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र के विशाखा चौथे पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी चन्द्र ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी गुरु है
। चन्द्र और गुरु व चन्द्र ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक वाक्पुष्ट होगा । क्योकि नक्षत्र पद 30 डिग्री से 00 मिनट से3 डीग्री 20 मिनट तक रहेगा । इस समय वृशिचक राशि में प्रवेश करेगा है । ऎसे
जातक वित्तीय व्यवसाय व वायुयात्रा करता है ।
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
पक्ष कृष्ण पक्ष
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
आज दिनॉक 17-04 -2014 22 बजकर 40 मिनट पर
चन्द्रमा जन्म समय में नक्षत्र के अनुराधा प्रथम पद में प्रवेश कर
करेगा है ।
नक्षत्र पद का स्वामी सूर्य ग्रह है तथा नक्षत्र का स्वामी शनि है
। चन्द्र और शनि व सूर्य ग्रह है । इस पाद जन्म लेने वाला जातक स्वभाव तीव्रता होगी क्योकि शनि और सूर्य दोनों ही क्रूर ग्रह है । क्योकि नक्षत्र पद 3 डिग्री से 20 मिनट से 6 डीग्री 40 मिनट तक रहेगा । इस समय वृशिचक राशि में प्रवेश करेगा है । ऎसे
जातक ऊनी वस्त्रो का व्यवसाय करता है ।
जय माँ अम्बे तेरी जय हो |
पक्ष कृष्ण पक्ष
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